बुधवार 23 सितंबर 2026 - 06:10
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी से जुड़ा एक यादगार वाक़्या

हौज़ा / हज़रत आयतुल्लहिल उज़मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़ुद्दिसा सिर्रह के निधन के संदर्भ में एक संक्षिप्त व्यक्तिगत संस्मरण प्रस्तुत है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम के हौज़ा-ए-इल्मिया के महान फ़क़ीह, मरजा-ए-तक़लीद, आलिम-ए-रब्बानी और फ़क़ीह-ए-अहल-ए-बैत अ.स.हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़ुद्दिसा सिर्रह के निधन की दुखद खबर अत्यंत रंज और दुख के साथ प्राप्त हुई।

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी ने अपने जीवन का एक लंबा हिस्सा उलूम-ए-मुहम्मदी व आले-मुहम्मद (अ.स.) की शिक्षा, अध्यापन, शोध, छात्रों की तरबीयत और मक्तब-ए-अहल-ए-बैत (अ.स.) की सेवा में गुज़ारा। अल्लाह तआला ने उन्हें लंबी और बरकत वाली ज़िंदगी प्रदान की, जिसका अधिकांश हिस्सा इल्म, तक़वा, फ़क़ाहत और दीन की सेवा में गुज़रा।

अपने वालिद-ए-बुज़ुर्गवार मरहूम आयतुल्लाह सैयद अहमद ज़ंजानी की तरह वे भी हरम-ए-मुतहर हज़रत फ़ातिमा मासूमा स.अ. में नमाज़-ए-जमाअत की इमामत से जुड़े रहे। मुझे भी हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम मुक़द्दसा में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के दौरान हरम-ए-मुत्तहर हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.अ.) के शबिस्तान-ए-इमाम ख़ुमैनी में हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी की इमामत में नमाज़-ए-मग़रिबैन अदा करने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा। वे क्षण आज भी मेरी यादों में एक रूहानी और अविस्मरणीय स्मृति के रूप में सुरक्षित हैं।

इस महान फ़क़ीह से जुड़ी एक व्यक्तिगत याद भी मेरे लिए हमेशा खुशी और गर्व का कारण रहेगी।

मेरे दादा-परदादा, मरहूम अल्लामा सैयद मुहम्मद निज़ामुद्दीन रिज़वी, समय-समय पर ज़ियारत के लिए क़ुम मुक़द्दसा और मशहद मुक़द्दस जाया करते थे। क़ुम में ठहरने के दौरान वे हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी की इमामत में नमाज़-ए-जमाअत में भी शामिल होते थे।

एक बार उन्होंने नमाज़ के दौरान महसूस किया कि हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी तशह्हुद और सलाम के समय अपना बायाँ पैर थोड़ा ऊँचा रखते और घुटने को ऊपर की ओर रखते हुए कुछ कठिनाई के साथ बैठते और उठते थे।

हरम से लौटने के बाद मेरे दादा-परदादा ने मुझसे इस स्थिति का ज़िक्र किया और कहा कि मुझे भी घुटनों में दर्द की शिकायत है। संभव है कि हज़रत आयतुल्लाह को भी इसी प्रकार का दर्द हो।

उन्होंने आगे बताया कि एक विशेष दवा के इस्तेमाल से उन्हें काफी आराम मिला है। अगर आयतुल्लाह से मुलाकात का अवसर मिले तो यह बात उनके सामने रखी जाए, शायद यह दवा उनके लिए भी लाभदायक हो।

इसके बाद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी से मुलाकात का अवसर मिला। उनके चिकित्सक से परामर्श के बाद इस संबंध में बात आगे बढ़ी। मुलाकात अत्यंत प्रेम, आत्मीयता और विनम्रता के माहौल में हुई। बाद में जब वह दवा हज़रत आयतुल्लाह के लिए लाभदायक साबित हुई तो उनके कार्यालय से समय-समय पर संपर्क होता रहा और मेरे दादा-परदादा वह दवा उनकी सेवा में भेजते रहे।

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी इस स्नेह और शुभचिंता के लिए विशेष रूप से आभार व्यक्त करते थे। एक बार उन्होंने तबर्रुक के तौर पर ख़ाक-ए-शिफ़ा, यानी सैयदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन (अ.) की पवित्र तुरबत भी मेरे दादा-परदादा के लिए उपहार के रूप में भेजी। यह आपसी प्रेम और सच्चे संबंध की एक बेहद खूबसूरत याद है।

यह छोटा-सा वाक़्या मेरे लिए केवल एक व्यक्तिगत स्मृति नहीं, बल्कि दो बुज़ुर्गों के बीच इल्म, प्रेम, सम्मान और मोमिनों की सेवा के खूबसूरत रिश्ते की यादगार है। आज जब हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़ुद्दिसा सिर्रह हमारे बीच नहीं रहे, तो यह स्मृति और भी गहरी और दिल को छू लेने वाली महसूस होती है।

यह संस्मरण मरहूम अल्लामा सैयद मुहम्मद निज़ामुद्दीन रिज़वी के नवासे सैयद मुहम्मद ताहा रिज़वी की व्यक्तिगत यादों और अनुभवों पर आधारित है।

अल्लाह तआला हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़ुद्दिसा सिर्रह की इल्मी और दीनी सेवाओं को अपनी बारगाह में स्वीकार फरमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए और उन्हें उनके पाकीज़ा पूर्वजों, उलमा व सालेहीन तथा मुहम्मद और आले-मुहम्मद (अ.स.) के पड़ोस में महशूर फरमाए।

ख़ुदावंद-ए-मुतआल मेरे दादा-परदादा मरहूम अल्लामा सैयद मुहम्मद निज़ामुद्दीन रिज़वी और हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी दोनों बुज़ुर्गों को शफ़ाअत-ए-मुहम्मद व आले-मुहम्मद (अ.स.), विशेष रूप से शफ़ाअत-ए-सैयदुश्शोहदा इमाम हुसैन (अ.) नसीब फरमाए।

अल्लाह तआला उनके परिजनों, संबंधियों, शागिर्दों, चाहने वालों और विशेष रूप से हौज़ा-ए-इल्मिया के तमाम उलमा व फ़ुज़ला को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम प्रदान करे तथा इस महान इल्मी कमी को अपनी रहमत से पूरा फरमाए।

सैयद मुहम्मद ताहा रिज़वी
नवासे-ए-मरहूम अल्लामा सैयद मुहम्मद निज़ामुद्दीन रिज़वी
सानको, कारगिल, लद्दाख (भारत)

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